Nari Ka Samman In Hindi Essay On Swachh

नारी का सम्मान

Nari ka samman Hindi Article

नारी का सम्मान Nari ka samman Hindi Article

 

हमारे देश में आज भी नारियों को वो सम्मान नहीं मिला है, जिसकी वो हक़दार हैं। आज भी बहुत सारी स्त्रियाँ ऐसी हैं। जिनकी कोई मर्ज़ी नहीं होती और उन्हें हर काम दूसरों के हिसाब से करना पड़ता है। और इसे नाम दिया जाता है भारतीय संस्कृति का।

क्या भारतीय संस्कृति में ये लिखा है, कि एक औरत को उसकी मर्ज़ी से जीने का कोई हक़ नहीं है, कई घरों में आज भी स्त्रियों का कोई सम्मान नहीं है, शायद यही कारण है कि आज भी हमारा देश उन्नति नहीं कर पा रहा है।

Government ने तो काफ़ी सारे कानून बनाये हैं, और काफी सारे समानताओं के अधिकार दिए हैं। लेकिन जब तक मानसिक तौर पर लोग नारी को वो सम्मान, वो अहमियत नहीं देंगे। हमारे देश का विकास कैसे संभव होगा।

आखिर नारी इतनी मजबूर क्यों है?  खुद सारी दुनियाँ की जननी होकर वह अपनी पहचान से इतनी दूर क्यों है ?  यूँ तो लोग नारी पर बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं, पर क्या वाकई में किसी ने नारी को वो सम्मान दिया है जिसकी वह हक़दार है।

शादी से पहले तो माता पिता अपनी बेटी को बड़े लाड़-प्यार से पालते हैं और बड़े धूमधाम से उन्हें विदा करते हैं, पर क्या शादी के बाद भी वो उतनी ही स्वतन्त्र रह पाती है, उसके विचारों को उतनी ही स्वतंत्रता दी जाती है। उसका सम्मान उतना ही होता है जितना माता पिता के घर में था।

क्यूँ सारे परिवार को अपना बनाने के बाद उसके सारे हक़ खो जाते हैं। क्यूँ सारे परिवार का ख्याल रखने के बाद उसके जज्बातों को समझने वाला कोई नहीं होता। क्यूँ शादी के सालों बाद ही उसे अपनी माँ के घर में अपनापन महसूस होता है।

क्यूँ सारे कर्तव्य स्त्री को ही समझाए जाते हैं क्यूँ सारे नियम स्त्रियों के लिए ही बनाए जाते हैं. क्यूँ उनके लिए गल्तियों की कोई गुंजाईश नहीं है।

क्या पुरुषों का फ़र्ज़ सिर्फ पैसे कमाना है। किसी की बेटी को अपने घर की बहु बनाने के बाद उसकी भावनाओं का ख्याल रखने की ज़िम्मेदारी किसकी होती है। उसकी अच्छाइयों के साथ उसकी कमियों को अपनाने की जिम्मेदारी किसकी है।

वो आपके घर में आकर आपकी अच्छाइयों और कमियों दोनों को Accept करती है, तो क्यूँ नहीं उसकी कमियों को Accept किया जाता है. क्या आपका फ़र्ज़ नहीं कि उसकी Capacity को समझें। क्यूँ उसके ऊपर उसकी capacity से ज्यादा जिम्मेदारियां डाल दीं जाती हैं।

क्यूँ किसी और की बेटी को अपनी बेटी की तरह नहीं समझ सकते। उसके दर्द में क्यूँ आपको तकलीफ नहीं होती। वो जिस माहौल से आई है, उसके विपरीत माहौल में रहना, रहन सहन, खाना पीना सब कुछ बदल जाता है। उसके लिए ये सब कितना मुश्किल होता होगा। इस बारे में कोई क्यूँ नहीं सोचता।

सबको अपने Expectation की फ़िक्र होती है जो कभी पूरे नहीं हो सकते। और जब वो सारी जिम्मेदारियों को पूरा करने में खुद को सक्षम नहीं पाती, सबकी नज़रों वो प्यार और इज्जत नहीं पाती। तब उसके अन्दर एक वगावत पैदा हो जाती है.और वह अपनी बातें रखना शुरू करती है, जो कि हर घर में लड़ाई झगड़े की वजह बनती है. वो चाह कर भी किसी को अपना नहीं बना पाती और जब उसकी चुप्पी टूटती है तब जो शोर होता है, वह घर में कलह का रूप धारण कर लेता है। जिससे बच्चों पर भी गलत असर होता हैं। और इसका जिम्मेदार भी सारा समाज उसे ही ठहराता है।

बहुत कम ही ऐसी स्त्रियाँ होती है, जो सारी जिन्दगी दूसरों के हिसाब से चले। इसलिए ज्यादात्तर घरों में सामंजस्य देखने को नहीं मिलता। सबकुछ होते हुए अन्दर ही अन्दर परिवार में एक तनाव रहता है।

ये स्थिति सबसे ज्यादा गाँव में और ऐसे घरों में है जहाँ लोग कम पढ़े-लिखे है। देखा जाये तो स्त्री ही स्त्री की दुश्मन है, स्त्री ही स्त्री को सारे नियम कानून मानने के लिये बाध्य करती है। ऐसे में हमारा देश तो पुरुषप्रधान होगा ही, जब महिलाएं खुद स्वीकार कर लेंगी कि उनकी यही जिन्दगी है, सदियों से यही चला आ रहा है। पुरुष सब कुछ हैं और स्त्री कुछ भी नहीं।

जब किसी घर में एक बहू आती है, तो वह गलत होती है। लेकिन जब उसी घर की बेटी ससुराल जाती है, तो उसके ससुराल वाले गलत होते हैं। ये Cycle चलता रहता है। गौर से देखें तो हर घर की बहू गलत है और बेटी सही है। ऐसे में नुकसान सिर्फ महिलाओं का है। हर जगह वही गलत सिद्ध हो रहीं है।

एक स्त्री को चाहिए की वह दूसरी स्त्री की मदद करे। एक बहू को चहिये कि वो सबके साथ मिलकर प्रेम से रहे। ससुराल को अपना घर समझकर अपनी जिम्मेदारी को समझे और पूरा करे। घर की हर महिला को उसकी मदद करनी चाहिए।

जब तक एक स्त्री खुद अपनी क़द्र करना नहीं सीखेगी, तब तक उसे कभी न्याय नहीं मिलेगा। किसी भी बेटी को ससुराल में माँ का प्यार नहीं मिलेगा। जिस दिन  एक बहु को एक बेटी की तरह प्यार मिलेगा, उसकी गलतियों को अपनी बेटी की तरह माफ़ किया जायेगा, उसे अपनी बेटी की तरह सिखाया जायेगा, सुधारा जायेगा। उस दिन हर घर की बेटी अपने ससुराल में खुश रहेगी।

अगर नारी ही नारी का सम्मान  करने लगे तो, इस पुरुष प्रधान देश में नारियों को सम्मान मिलना संभव होगा

 

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“मेरी सरकार” के मंच पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के एसएमएस अभियान हेतु विषयवस्तु सुझाने के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसके लिए हमें लगभग 2000 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं जिनमें से 13 प्रविष्टियों को विजेता चुना गया है। विजेताओं के नाम निम्नलिखित है-

क्रमांकएसएमएस सामग्रीनाम और पता
1.Every Girl is precious. Educate a girl and strengthen the Nationश्रेया शाम,पुणे, महाराष्ट्र
2.When you educate a boy, you educate the present but when you educate a girl, you educate the future of your country.अमित मिश्रा, मनकापुर,उत्तर प्रदेश
3.She is mother, she is sister, she is wife, she should be your daughter. Beti Bachao Beti Padhaoसाईंराम नदीमपल्ली, मुरामल्ला, आंध्र प्रदेश
4.An educated son accommodates his family and an educated daughter accommodates two families and three generations.मनु शुक्ला,कानपुर, उत्तर प्रदेश
5.Man thinks he is a “HERO” but if he kills “HER” he’ll just remain a “0”.Educate our girl and you educate our Indiaभाविन ठाकरे,दोम्बिवली, महाराष्ट्र
6.She is Precious. She is Happiness. She is Stability. She is Life. She is her. Celebrate Her.राम एन,बैंगलोर, कर्नाटक
7.The happiness of a nation lies in the dignity of its daughters. Beti Bachao Beti Padhaoअजय अग्रवाल, दिल्ली,दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र)
8.बेटी बचाएंगे तो संस्कृति बचाएंगे ओर बेटी पढाओगे तो भविष्य बनाओगेलक्ष्मीकांत जैन, औरंगाबाद, महाराष्ट्र
9.करें शादी सादगी से दहेज़ दें सीर्फ विद्या का प्रदीप शाह, अहमदाबाद,गुजरात
10.शिक्षित बेटी का मतलब शिक्षित परिवार और शिक्षित राष्ट्रआलोक त्रिपाठी, मुंबई
11.बेटी है वरदान, इसका करो सम्मानअजय चौबे, सिंगरौली, मध्य प्रदेश
12.जब बेटी की होगी प्रगति, घर की होगा सर्वोन्नतिआर. कामथ, अनुविजय टाउनशिप, तमिलनाडु
13.हो शिक्षित बहू और बेटी, तो बने विकसित कुल और कुटुम्बक्षामा अग्रवाल, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

 

चूँकि विजेता के रूप में 6 से अधिक प्रविष्टियाँ चुनी गई हैं, इसलिए पुरस्कार में दी जाने वाली राशि को 13 विजेताओं में सामान रूप से बाँटा जाएगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की “बेटी बचाओ, बेटी पढाओ” पहल पर कार्य कर रहा समूह, जल्द ही आपसे संपर्क करेगा!

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